Friday, June 30, 2006

फुटबॉल पर एक नज़र

बहुत दिनों से सोच रहा था कि विश्वकप फुटबॉल पर कुछ लिखूंगा, लेकिन दूसरे मुद्दों के आने के कारण लिख नही पा रहा था। अभी तक के सारे मैच देखे। कुछ रिकोर्ड करके देखे कुछ सीधा प्रसारण, और कुछ रिपीट टेलीकास्ट में। बहुत सी टीमों ने प्रभावित किया। सबसे आगे थी घाना। घाना का चेक रिपब्लिक के साथ मैच तो बहुत शानदार लगा। एक गरीब सुविधाविहीन अफ्रीकी देश, जिसके राष्ट्रपति ने घोषणा की थी कि अगर एक भी मैच जीत कर वापस आये तो हर खिलाडी को २५००० डालर मिलेंगे। जीवन भर की कमाई एक मैच से, हर खिलाडी को मैच खेलते समय दिखती रही होगी। चेक रिपब्लिक को हराने के बाद हर खिलाडी जिस तरह उस मैदान को चूम रहा था वो अविस्मरणीय दृश्य था। टीम का हौसला उस मैच के बाद बढ गया और फिर उन्होने संयुक्त रास्ट्र अमेरिका को हराया। ये भी एक शानदार मैच था। सर्वशक्तिमान राष्ट्र एक गरीब पिद्दी से देश से हार गया, लोगों ने खिलाडियों की वैसी छीछालेदर की जैसी अपने यहां क्रिकेट में हार के बाद कर डालते हैं। कोच पर भी थू थू हुई।

दूसरी टीम जिसने प्रभावित किया। वो थी स्विट्ज़रलैण्ड, छोटा सा देश, जहाँ तक मुझे याद पडता है, पहली बार विश्च कप में खेला। लेकिन शानदार प्रदर्शन रहा। जर्मनी, ब्राजील और अर्जेन्टीना तो खैर बहुतों की पसंदीदा टीमें थीं। जहां इंग्लैण्ड तथा फ्रांस पहले के मैचों में प्रभावित करने में असफल रहीं, अब उन्होने भी गति पकड ली है। तीसरी टीम दक्षिण कोरिया थी, जिसके साफ सुथरे खेल और शानदार पासेस का मै पिछले विश्व कप से प्रशंसक हूं।

आज सुबह एक धमाकेदार मैच में पैनाल्टी शूटआउट में अर्जेन्टीना जर्मनी से हार गया। क्या मैच था? मैच के बाद अर्जेन्टीनी खिलाडियों को रोते देखना दारुण दृश्य था। मेरी बगल के डेस्क पर बैठने वाले महानुभाव अर्जेन्टीना के हैं और बिल्कुल पागलों की तरह अपनी टीम का समर्थन करते हैं। उन्होने मुझे कल ही बता दिया था कि अगर अर्जेन्टीना हार गया, तो मै पूरा दिन किसी से बात नही करूंगा। मै डरा हुआ था कि मै उनसे आंखें नही मिलाऊंगा, लेकिन यह क्या? हँसते हुए जनाब बोले अब मै इटली को सपोर्ट करूंगा, मेरी ससुराल की टीम (सुनील जी की तरह)। मैने डरते डरते पूछ लिया अगर मैच अर्जेन्टीना और इटली का हो तो क्या करेंगे? बोले, कुछ नही जी, हम दोनों मियां बीबी एक ही टी वी के सामने बैठ अपनी अपनी टीम का समर्थन करेंगे। फिर जिसकी टीम जीतेगी, वो खाना बनायेगा। वाह साहब वाह, रास आई मुझे "इश्टाइल"।

और इटली ने यूक्रेन को ३-० से हरा कर सेमीफाइनल में प्रवेश किया है। ये मैच मुझे घर जाकर देखना है।

बहरहाल अब मामला जर्मनी और ब्राजील के फाइनल की तरफ जाता दिख रहा है। पर इंग्लैण्ड, इटली और फ्रांस भी हैं अभी तक दावेदारी में।
अब तक का सबसे अच्छा गोल था (जो मुझे लगा), बेकहम का इक्वेडोर के खिलाफ किया गया गोल। ना देखा हो तो वीडियो क्लिप यहां देखें।
चलते चलते दो वाक्य जो मुझे पसंद आये।
१) जब स्विट्ज़रलैण्ड यूक्रेन से पैनाल्टी शूट में हारा तो एक स्विस खिलाडी ने कहा "ये सबसे ज्यादा अन्यायपूर्ण खेल है"।
२) जब घाना ने चेक रिपब्लिक को हराया, कमेंट्रेटर ने कहा "कोई भी टीम किसी विशेष दिन किसी भी टीम को हरा सकती है"।

यूरोप और दक्षिण अमेरिका की कई टीमें "सॉकर गॉड" मतलब "फुटबॉल के भगवान" कही जाती हैं, अफ्रीकी या एशियाई टीमें अभी बहुत पीछे हैं।
चलिये थोडा सा इंतजार और।

3 प्रतिक्रियाएँ:

  • प्रेषक: Blogger अनूप शुक्ला [ Friday, June 30, 2006 6:19:00 PM]…

    अपने देश का मामला तो अभी फुटबाल की तरह दिखता है-गोल!

     
  • प्रेषक: Blogger Neeraj [ Monday, July 03, 2006 11:31:00 AM]…

    काहे का इंतज़ार अब भैये. अपनी टीमें तो निपट गईं. अब तो पुर्तगाल को जिता दो. वैसे बेकहम की गोलंदाज़ी तो वाकई अजब-ग़ज़ब रही. वीडियो के लिए धन्यवाद.

     
  • प्रेषक: Blogger ई-छाया [ Monday, July 03, 2006 2:49:00 PM]…

    अनूप जी, नीरज जी,
    पधारने तथा टिपयाने के लिये धन्यवाद, अनूप जी हमारे देश का तो मामला सचमुच ही गोल है। नीरज जी, मै तो टीम-निरपेक्ष होकर मैच देखूंगा, फिर अपनी टीम हार गई तो दुःख नही होता ना। वैसे भी भारत तो है नही इसमें, अपना देश।

     

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