Friday, June 09, 2006

क्या आप बता सकते हैं?

सावधान।
कमजोर दिल वाले न पढें।

चाँदनी रात है
चारों ओर सन्नाटा
कुछ अजीब सी आवाजें
देखता हूँ इधर उधर
उठाकर सर को जब
छाई है खामोशी
कोई नही है दूर दूर तक
लाल रंग की मिट्टी पर
कब्रें ही कब्रें हैं बस
भयावह आहटें
डरावनी आकृतियाँ
चलती है हवायें
सरसराती हुई सी
चाहता हूँ चीखना मै
जोर से गला फाडकर
कुछ फँस गया है गले में
भागने की कोशिश में
जब उठाता हूँ पाँव
निकलते हैं कई हाथ
जमीन के अंदर से
रोकने के लिये मुझे
दूर दूर तक बस
कब्रें हैं और हाथ हैं
और है भयानक बेबसी
क्या करूँ क्या नही
इतने में कहीं दूर से
आती है इक आवाज
जानी पहचानी सी
तेज होती हुई
छुट्टी है क्या आज
उठना नही है क्या?
खोलता हूँ आँखें मै
उफ, क्या भयानक
स्वप्न था ये
पर अगर ये स्वप्न था
तो कहाँ से आई ये
लाल मिट्टी मेरे पैरों में
क्या वो हकीकत थी?
क्या आप बता सकते हैं?

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