बदलाव
पिछले कुछ दिनों में बहुत कुछ बदल गया। जिंदगी बदलाव का नाम है। संगणक तकनीकी के लिये काम करते भागते दौडते हुए कितने पडावों को हम पीछे छोड जाते हैं यह कभी थमने और सॉस लेने के लिये सुस्ताने के बाद ही समझ में आता है। लोग मिलते हैं, बिछडते हैं, जगहें बदलती हैं, वातावरण बदलते हैं। जिंदगी का एक नया मोड, नये रास्ते, नई मंजिलें, नये साथी संगी फिर एक बार बुला रहे है। जी हां, मै नौकरी, शहर बदल रहा हूं और जिंदगी में एक बार फिर से एक नये शहर में एक अजनबी बन कर जा रहा हूं। अब तो सब कुछ नये सिरे से शुरू करने में डर भी नही लगता, शायद पहले हर बार हरारत सी होती थी। यहां सब कुछ हैंडओवर टेकओवर करने में आगे के कुछ सप्ताह लगेंगे। नई जगह स्थापित होने में कुछ और। तब तक आप सबसे विदा लेता हूं। उम्मीद यही है कि यह अंतिम विदा नही है। मै जल्दी ही कुछ सप्ताहों में फिर वापस आऊंगा, अपनी कहानी सुनाने और आप सबकी सुनने। तब तक के लिये नमस्कार, और हां अगर किसी करणवश वापस न आ सकूं तो कहा सुना माफ करियेगा और मुझे भूल जाइयेगा लेकिन जारी रखियेगा हिंदी का यह बुलंद अभियान, जिसमें आयेंगे मुझसे बहुत बेहतर बहुतेरे भविष्य में।
जिंदगी है भागती दौडती, कोई किसी के लिये रुकता नही
लगातार भागते ही रहना है, जब तक ये दम चुकता नही
जय हिंद, जय भारत।
जिंदगी है भागती दौडती, कोई किसी के लिये रुकता नही
लगातार भागते ही रहना है, जब तक ये दम चुकता नही
जय हिंद, जय भारत।









16 प्रतिक्रियाएँ:
प्रेषक:
उन्मुक्त [
Friday, September 01, 2006 5:25:00 PM]…
'मुझे भूल जाइयेगा' भाई यह तो सम्भव नहीं
प्रेषक:
Raviratlami [
Friday, September 01, 2006 6:36:00 PM]…
...तब तक के लिये नमस्कार, और हां अगर किसी करणवश वापस न आ सकूं तो कहा सुना माफ करियेगा और मुझे भूल जाइयेगा लेकिन जारी रखियेगा हिंदी का यह बुलंद अभियान, जिसमें आयेंगे मुझसे बहुत बेहतर बहुतेरे भविष्य में।..
जी हाँ, परंतु आप जैसा कोई नहीं मिलेगा. अतः शीघ्र वापस आइए. एक नई ऊर्जा के साथ.
प्रेषक:
अनूप शुक्ला [
Friday, September 01, 2006 8:06:00 PM]…
नयी जगह में स्थापित होने के लिये शुभकामनायें।
प्रेषक:
Tarun [
Friday, September 01, 2006 8:11:00 PM]…
नई जगह के लिये बधाई, वापसी तो होगी ही इसलिये इस बारे में क्या कहना
प्रेषक:
रत्ना [
Friday, September 01, 2006 10:37:00 PM]…
नई जगह के लिए शुभकामनाएं। हम लोगों के बीच शीघ्र लौटे और नए किस्से सुनाएं।
प्रेषक:
आशीष [
Saturday, September 02, 2006 10:04:00 AM]…
नयी जगह और नयी नौकरी के लिये शुभकामनायें।
वापिस आइयेगा जरूर!
प्रेषक:
Jagdish Bhatia [
Sunday, September 03, 2006 9:14:00 AM]…
छाया जी आपका इंतजार रहेगा।
प्रेषक:
Pratyaksha [
Sunday, September 10, 2006 9:17:00 PM]…
उम्मीद है आप जल्दी लौटेंगे
प्रेषक:
Manish [
Monday, September 18, 2006 8:55:00 AM]…
छाया आपका इंतजार रहेगा। उम्मीद है आप नयी जगह में स्थापित हो जल्द लौटेंगे
प्रेषक:
प्रियंकर [
Friday, October 06, 2006 1:43:00 AM]…
नए अभियान के लिए शुभकामनाएं : शुभास्ते पंथनम संतु . ना!,भूलेंगे नहीं और भुलाने भी न देंगे . जल्दी लौटिए और अधिक रचनाशील हो कर .
प्रेषक:
Manish [
Thursday, November 02, 2006 5:59:00 AM]…
Huzoor kidhar hain abhi tak?
प्रेषक:
Dawn....सेहर [
Sunday, November 12, 2006 12:57:00 PM]…
Wah...aapko dhundte chale aaye to dekha aap khud muruf hain :)
aapki baaton se milti julti hee kuch humne likhi aur yahan bhi jab wohi paaya to apne soch per shaq nahi hua :)
khush rahein sada
Adaab
Sehar
प्रेषक:
Pramendra Pratap Singh [
Monday, November 13, 2006 12:00:00 AM]…
काफी दिनो बाद यहां आया तो देखा कि आप कही चले गये है, आप अब आप नये स्थान पर बस गये होगे अपने इस परिवार को मत भूलो। हमे आप का इन्तजार है।
प्रेषक:
Dawn....सेहर [
Friday, December 01, 2006 3:46:00 PM]…
Phir chale aaye hum tere kuche per
...janab kahan hain ghumshuda
प्रेषक:
अतुल शर्मा [
Saturday, December 02, 2006 6:58:00 AM]…
आपका नया काम, नया धाम सभी कुछ व्यवस्थित हो गया होगा। अब देरी किस बात की...यहाँ आपकी प्रतीक्षा की जा रही है।
प्रेषक:
Manish [
Monday, January 01, 2007 11:05:00 AM]…
नया साल मुबारक हो !
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