Thursday, August 24, 2006

उफ्फ ये क्या हुआ

IAU की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर कहां तो हम आस लगाये बैठे थे कि सौर मंडल में पूरे दर्जन भर ग्रह हो जायेंगे, लेकिन लगता है कि वैज्ञानिक आगे आने वाली बहुत से नये आकाशिय पिंडों की ग्रह बनाये जाने की दावेदारी, और उसके बाद के गडबडझालों की संभावना से घबरा गये।

प्राग, चेक रिपब्लिक में समाप्त हुए विश्व भर से आये २५०० वैज्ञानिकों के १४ से २५ अगस्त तक चले IAU के २६वें सम्मेलन में आज जारी IAU की रिपोर्ट के अनुसार प्लूटो से ग्रह का दर्जा छीन लिया है और सौरमंडल में केवल आठ ग्रहों को मान्यता दी है। इस प्रकार से सेरेस और कैरोन को भी प्लूटो के साथ बौने ग्रहों का दर्जा दिया गया है, वहीं ज़ेना को आकाशीय पिंड मात्र माना गया है। ज्यादा जिज्ञासु लोग सवालों के जवाब यहां देख सकते हैं। IAU का आधिकारिक जालस्थल है। यदि कभी आसमान में दूरबीन लेकर ताकते वक्त आपको लगे कि आपने कोई नया आकाशीय पिंड खोज निकाला है तो आप इन्हे बता सकते हैं (वैसे यह जानकारी उडन तश्तरी वाले समीर जी के लिये शायद उपयोगी हो)।

8 प्रतिक्रियाएँ:

  • प्रेषक: Anonymous Tarun [ Thursday, August 24, 2006 5:40:00 PM]…

    अब मैं ये सोच रहा हूँ कि अपने ज्योतिषियों का क्या होगा और नवग्रहों के शांति पाठ का क्या? प्लूटो उदास बैठा है, सोच सकता हूँ मैंॉ

     
  • प्रेषक: Blogger Udan Tashtari [ Thursday, August 24, 2006 6:12:00 PM]…

    पूरा पचांग नये सिरे से लिखा जायेगा अब...

     
  • प्रेषक: Anonymous आशीष [ Thursday, August 24, 2006 8:41:00 PM]…

    मुझे वैसे इस निर्णय से खुशी हे हुयी, क्योंकि प्लुटो को ग्रह मानने का निर्णय ही गलत था। कितनी सारी विसंगतिया थी प्लुटो के साथ
    १. कक्षा अन्य ग्रहो के प्रतल मे नही थी।
    २. कक्षा नेपच्युन की कक्षा के अंदर से जाती थी।
    ३. द्रव्यमान काफी कम था(चार चंद्रमा उससे बडे थे, हमारे चंद्रमा को लेकर)
    ४. प्लुटो अपने चंद्रमा शेरान(केरान) का भी चक्कर लगाता था ।

     
  • प्रेषक: Anonymous नितिन बागला [ Thursday, August 24, 2006 10:50:00 PM]…

    तरुन जी,
    नवग्रह के शांति पाठ अभी भी चलते रहेंगे..
    जहाँ तक मेरी जानकारी है, ये बाद के २-३ छोटे ग्रह भारतीय ज्योतिष का हिस्सा हैं ही नही....बल्कि यहाँ सूर्य, चंद्र आदि आकाशीय पिंडॊं को मिला कर नौ ग्रह होते हैं...
    प्लूटो १९३० में खोजा गया था, जबकि ये हवन एवं शांतिपाठ काफ़ी पहले से चल रहे हैं..

     
  • प्रेषक: Blogger RCMishra [ Thursday, August 24, 2006 11:34:00 PM]…

    १९३० मे प्लूटो के खोज के पहले से ही, भारतीय खगोल शास्त्र या वैदिक ग्रन्थों के अनुशार ग्रहों की सन्ख्या ९ है, जिसमे आखिरी के तीन ग्रहो का नाम अरुण, वरुण और यम रखा गया है।
    उस समय किस आधार पर यम को ग्रह मान लिया गया था, या फ़िर सब कुछ केवल सैद्धान्तिक था?

    बागला जी का कहना कि ग्रह = आकाशीय पिंड! क्या हमारा वैदिक खगोल शास्त्र इतना ग्रह को परिभाषित नही कर सका था?

     
  • प्रेषक: Anonymous नितिन बागला [ Friday, August 25, 2006 1:28:00 AM]…

    मिश्र जी, ये तो नही कह सकता कि वैदिक खगोल शास्त्र ग्रहों को परिभाषित कर सकता था या नही, या किस आधार पर करता था, लेकिन जिस नवग्रह शांति का जिक्र तरुन जी ने किया था, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ये वे हैं..
    सूर्य, चंद्र, मंगल,बुध, बृहस्पति,शुक्र, शनि, राहु और केतु.

    अरुण, वरुण , यम का जिक्र नही आता इनमें....और ना ही पृथ्वी...

    ये सब किस आधार पर था, इसके बारे में शायद कोई अन्य जानकार बता पाये...

    थोडी जानकारी यहाँ देखिये..

    http://www.webonautics.com/mythology/navagraha.html

    http://www.chennaionline.com/festivalsnreligion/slogams/slogam45.asp

    छाया जी, माफ़ी चाहूंगा, टिप्पणी आपके लेख से थोडी असंबद्ध है...

     
  • प्रेषक: Blogger ई-छाया [ Friday, August 25, 2006 12:35:00 PM]…

    टिप्पणी कत्तई असंबद्ध नही है।
    नितिन जी, पूजा में आने वाले नवग्रह आपने बिल्कुल सही बताये हैं। राहु और केतु को छोड इनमें से हर एक के नाम सप्ताह का एक दिन है। पृ्थ्वी को इसमें शामिल नही किया जाता क्यों कि उसका अलग से आवाहन किया जाता है, क्योंकि हम उसमें रहते हैं इसलिये बाहरी ग्रह नही माना जाता उसे। (शायद गौरी पूजन उसका ही रूप है)।
    रही बात अरूण, वरूण, यम की, तो यह हमने हिंदी मे सौर मंडल के ग्रहों के नाम पढे थे (यूरेनस, नेप्च्यून और प्लूटो)।
    प्लूटो, बेचारा प्लूटो यानी कि यम। (वैसे मैने बहुत से लोगों को कुत्तों का नाम प्लूटो रखते सुना है, लोग भी ना।)

     
  • प्रेषक: Blogger hemanshow [ Wednesday, August 30, 2006 2:05:00 PM]…

    ये क्या हुआ, कैसे हुआ,
    खैर, जो हुआ अच्छा हुआ।

     

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