Thursday, July 13, 2006

संतासिंह समुद्र तट पर

Akshargram Anugunj

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संतासिंह जी समुद्र तट पंहुचे। बहुत से लोगों को धूप में रेत पर पसरा हुआ देख खुद भी चौडे हो गये। आने जाने वालों ने संता को सतत् खीसें निपोरता हुआ देख पूछना शुरू किया "आर यू रिलैक्सिंग"। संता साहब बोले "नो जी, आय्यम संतासिंह"। जब कई एक लोगों से उनका यही संवाद रहा तो संता से रहा न गया "स्साला ये रिलैक्सिंग कौन है, जो गुम गया है, और पब्लिक मेरा मगज खा रही है"। संता उठे और उन्होने ढूँढना शुरू किया। अब क्या है सरदार तो विश्व में कहीं भी मिल जाते हैं "ओम्नीप्रेज़ेंट" हैं, तो थोडी दूर में एक और सरदार मिल गया, बेचारा वो भी रेत में धूप सेंक रहा था। संतासिंह ने आव देखा ना ताव सवाल दाग दिया "आर यू रिलैक्सिंग"। दूसरा सरदार थोडा पढा लिखा समझदार टाइप था, बोला "यस आय्यम रिलैक्सिंग"। फिर क्या था संतासिंग का पारा चढ गया, दहाडे "ओये हरामखोर, तू इत्थे लेट्या है, और उत्थे पब्लिक मेरा दिमाग खा रई असी"।

3 प्रतिक्रियाएँ:

  • प्रेषक: Anonymous Tarun [ Thursday, July 13, 2006 5:57:00 PM]…

    क्या भाया छाया, हमने भी यही जोक लिखा था तुम पहले ही पोस्ट कर दिये, अब दूसरा लिखना पड़ेगा।

     
  • प्रेषक: Anonymous संजय बेंगाणी [ Thursday, July 13, 2006 9:31:00 PM]…

    एक से अनुगूजँ का क्या होगा?

     
  • प्रेषक: Blogger ई-छाया [ Thursday, July 20, 2006 11:45:00 AM]…

    पढने के लिये आप सभी को धन्यवाद।
    तरुण जी, कोई गल्ल नही जी, मै आपका नाम डाले देता हूँ जी।
    संजय जी, और भी भेजे हैं भाई।

     

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