tag:blogger.com,1999:blog-26625939.post115644939305324981..comments2007-03-02T14:03:52.459-08:00Comments on छाया (shadow): उफ्फ ये क्या हुआई-छायाhttp://www.blogger.com/profile/15074429565158578314noreply@blogger.comBlogger8125tag:blogger.com,1999:blog-26625939.post-1156971932064406442006-08-30T14:05:00.000-07:002006-08-30T14:05:00.000-07:00ये क्या हुआ, कैसे हुआ,खैर, जो हुआ अच्छा हुआ।ये क्या हुआ, कैसे हुआ,<BR/>खैर, जो हुआ अच्छा हुआ।hemanshowhttp://www.blogger.com/profile/12793312854612212185noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-26625939.post-1156534521671418122006-08-25T12:35:00.000-07:002006-08-25T12:35:00.000-07:00टिप्पणी कत्तई असंबद्ध नही है।नितिन जी, पूजा में आन...टिप्पणी कत्तई असंबद्ध नही है।<BR/>नितिन जी, पूजा में आने वाले नवग्रह आपने बिल्कुल सही बताये हैं। राहु और केतु को छोड इनमें से हर एक के नाम सप्ताह का एक दिन है। पृ्थ्वी को इसमें शामिल नही किया जाता क्यों कि उसका अलग से आवाहन किया जाता है, क्योंकि हम उसमें रहते हैं इसलिये बाहरी ग्रह नही माना जाता उसे। (शायद गौरी पूजन उसका ही रूप है)।<BR/>रही बात अरूण, वरूण, यम की, तो यह हमने हिंदी मे सौर मंडल के ग्रहों के नाम पढे थे (यूरेनस, नेप्च्यून और प्लूटो)।<BR/>प्लूटो, बेचारा प्लूटो यानी कि यम। (वैसे मैने बहुत से लोगों को कुत्तों का नाम प्लूटो रखते सुना है, लोग भी ना।)ई-छायाhttp://www.blogger.com/profile/15074429565158578314noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-26625939.post-1156494494016331372006-08-25T01:28:00.000-07:002006-08-25T01:28:00.000-07:00मिश्र जी, ये तो नही कह सकता कि वैदिक खगोल शास्त्र ...मिश्र जी, ये तो नही कह सकता कि वैदिक खगोल शास्त्र ग्रहों को परिभाषित कर सकता था या नही, या किस आधार पर करता था, लेकिन जिस नवग्रह शांति का जिक्र तरुन जी ने किया था, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ये वे हैं..<BR/>सूर्य, चंद्र, मंगल,बुध, बृहस्पति,शुक्र, शनि, राहु और केतु.<BR/><BR/>अरुण, वरुण , यम का जिक्र नही आता इनमें....और ना ही पृथ्वी...<BR/><BR/>ये सब किस आधार पर था, इसके बारे में शायद कोई अन्य जानकार बता पाये...<BR/><BR/>थोडी जानकारी यहाँ देखिये..<BR/><BR/>http://www.webonautics.com/mythology/navagraha.html<BR/><BR/>http://www.chennaionline.com/festivalsnreligion/slogams/slogam45.asp<BR/><BR/>छाया जी, माफ़ी चाहूंगा, टिप्पणी आपके लेख से थोडी असंबद्ध है...नितिन बागलाhttp://saptrang.wordpress.comnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-26625939.post-1156487689179004952006-08-24T23:34:00.000-07:002006-08-24T23:34:00.000-07:00१९३० मे प्लूटो के खोज के पहले से ही, भारतीय खगोल श...१९३० मे प्लूटो के खोज के पहले से ही, भारतीय खगोल शास्त्र या वैदिक ग्रन्थों के अनुशार ग्रहों की सन्ख्या ९ है, जिसमे आखिरी के तीन ग्रहो का नाम अरुण, वरुण और यम रखा गया है।<BR/>उस समय किस आधार पर यम को ग्रह मान लिया गया था, या फ़िर सब कुछ केवल सैद्धान्तिक था? <BR/><BR/>बागला जी का कहना कि ग्रह = आकाशीय पिंड! क्या हमारा वैदिक खगोल शास्त्र इतना ग्रह को परिभाषित नही कर सका था?RCMishrahttp://www.blogger.com/profile/09541282321814427194noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-26625939.post-1156485012475272682006-08-24T22:50:00.000-07:002006-08-24T22:50:00.000-07:00तरुन जी,नवग्रह के शांति पाठ अभी भी चलते रहेंगे..जह...तरुन जी,<BR/>नवग्रह के शांति पाठ अभी भी चलते रहेंगे..<BR/>जहाँ तक मेरी जानकारी है, ये बाद के २-३ छोटे ग्रह भारतीय ज्योतिष का हिस्सा हैं ही नही....बल्कि यहाँ सूर्य, चंद्र आदि आकाशीय पिंडॊं को मिला कर नौ ग्रह होते हैं...<BR/>प्लूटो १९३० में खोजा गया था, जबकि ये हवन एवं शांतिपाठ काफ़ी पहले से चल रहे हैं..नितिन बागलाhttp://saptrang.wordpress.comnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-26625939.post-1156477295596804542006-08-24T20:41:00.000-07:002006-08-24T20:41:00.000-07:00मुझे वैसे इस निर्णय से खुशी हे हुयी, क्योंकि प्लुट...मुझे वैसे इस निर्णय से खुशी हे हुयी, क्योंकि प्लुटो को ग्रह मानने का निर्णय ही गलत था। कितनी सारी विसंगतिया थी प्लुटो के साथ<BR/>१. कक्षा अन्य ग्रहो के प्रतल मे नही थी।<BR/>२. कक्षा नेपच्युन की कक्षा के अंदर से जाती थी।<BR/>३. द्रव्यमान काफी कम था(चार चंद्रमा उससे बडे थे, हमारे चंद्रमा को लेकर)<BR/>४. प्लुटो अपने चंद्रमा शेरान(केरान) का भी चक्कर लगाता था ।आशीषhttp://ashish.net.in/khalipilinoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-26625939.post-1156468320823266142006-08-24T18:12:00.000-07:002006-08-24T18:12:00.000-07:00पूरा पचांग नये सिरे से लिखा जायेगा अब...पूरा पचांग नये सिरे से लिखा जायेगा अब...Udan Tashtarihttp://www.blogger.com/profile/06057252073193171933noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-26625939.post-1156466444484143252006-08-24T17:40:00.000-07:002006-08-24T17:40:00.000-07:00अब मैं ये सोच रहा हूँ कि अपने ज्योतिषियों का क्या ...अब मैं ये सोच रहा हूँ कि अपने ज्योतिषियों का क्या होगा और नवग्रहों के शांति पाठ का क्या? प्लूटो उदास बैठा है, सोच सकता हूँ मैंॉTarunhttp://www.readers-cafe.netnoreply@blogger.com